भूपति को काम करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उनके पास पर्याप्त रुपया था और बाजार भी गर्म था। किन्तु ग्रहों के प्रभाव से उन्होंने क...
बचपन से ही उनको अंग्रेजी में लिखने तथा वक्तृता देने का शौक था। किसी प्रकार का प्रयोजन न रहने पर भी अंग्रेजी अख़बार में वे सम्पादक के नाम पत्र लिखते, और वक्तव्य न रहने पर भी सभाओं में दो-एक बात बोले बिना न रहते ।
उनके समान धनी व्यक्ति को बल में पाने के लिए राजनीतिक दलपतियों के निरन्तर वाह-वाह करते रहने के कारण अपनी अंग्रेजी लेखन-शक्ति के संबंध में उनकी धारणा यथेष्ट परिपुष्ट हो गई थी।
अंत में उनके साले वकील उमापति ने वकालत के व्यवसाय से हतोत्साहित होकर बहनोई से कहा, "भूपति, तुम एक अंग्रेज़ी अख़बार निकालो ! तुम्हारा जिस प्रकार असाधारण.." इत्यादि ।
भूपति उत्साहित हो उठे। दूसरे के अख़बार में पत्र प्रकाशित करवाने में कोई गौरव नहीं है, अपने अख़बार में स्वाधीन लेखनी को पूरे वेग से दौड़ा सकेंगे। साले को सहकारी बनाकर अत्यन्त छोटी अवस्था में ही भूपति ने संपादक की गद्दी पर शासन जमाया ।
छोटी अवस्था में सम्पादकी तथा राजनीति का नशा बहुत जोरों से चढ़ता है। भूपति को नचाने वाले लोग भी अनेक थे। आगे पढ़ें
COMMENTS